मई 09 – मैं ने संसार को जीन लिया है।
“मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्ति मिले; संसार में तुम्हें क्लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीन लिया है॥” (यूहन्ना 16:33)
किसी इंसान की परीक्षा तीन तरीकों से होती है: अपनी ही इच्छाओं से—जब वह उनकी ओर खिंच जाता है और लालच में पड़ जाता है (याकूब 1:13), शैतान से, जो उसे ललचाता है (मत्ती 4:3; 2 कुरिन्थियों 2:11), और परमेश्वर से.
हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जो प्रलोभनों से भरी है. शरीर की वासना, आँखों की अभिलाषा, और जीवन का घमंड लगातार परमेश्वर के लोगो पर दबाव डालते रहते हैं.
जब कोई इंसान लालच में फँस जाता है: तो उसका ज़मीर उसे कोसने लगता है; उसका आनंद गायब हो जाता है; और वह निराश हो जाता है. इसीलिए प्रभु ने हमें यह प्रार्थना करना सिखाया: “हमें परीक्षा में न डाल, बल्कि बुराई से बचा.” (मत्ती 6:13)
हमारे पहले माता-पिता, आदम और हव्वा, परीक्षा में फँस गए थे. मना किया हुआ फल खाने से दुनिया में पाप आ गया—जिसके साथ श्राप, बीमारी और मौत भी आ गई.
लेकिन अब, प्रभु ने अपने कीमती लहू और गवाही भरे जीवन के ज़रिए हमें परिक्षा पर विजय दिला दी है. बाइबल कहती है: “और वे मेम्ने के लोहू के कारण, और अपनी गवाही के वचन के कारण, उस पर जयवन्त हुए, और उन्होंने अपने प्राणों को प्रिय न जाना, यहां तक कि मृत्यु भी सह ली.” (प्रकाशितवाक्य 12:11)
परीक्षा के समय, परमेश्वर मुश्किलों के ज़रिए अपने लोगों को सोने की तरह निखारता है:
मूसा को जंगल में तराशा गया,
यूसुफ को जेल में,
दाऊद को पहाड़ों और गुफाओं में,
अय्यूब को भयानक दुख-तकलीफ़ों के ज़रिए,
पौलुस को मार-पीट और सताए जाने के ज़रिए,
यूहन्ना को पातमुस टापू पर अकेलेपन के ज़रिए,
ये दुख-तकलीफ़ें हमारी आत्मा को मज़बूत बनाती हैं और हमें परमेश्वर के पास ले जाती और सहनशक्ति देती हैं. “जैसा लिखा है, कि तेरे लिये हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम वध होने वाली भेंडों की नाईं गिने गए हैं. परन्तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिस ने हम से प्रेम किया है, जयवन्त से भी बढ़कर हैं.” (रोमियों 8:36–37)
परमेश्वर के प्रिय लोगों, मुश्किलों के समय अपनी नज़रें मसीह पर टिकाए रखे. गवाहों का एक बहुत बड़ा समूह यह देख रहा है कि आप अपनी मुश्किलों का सामना कैसे करते है. मज़बूती से डटे रहे!
“धन्य है वह मनुष्य, जो परीक्षा में स्थिर रहता है; क्योंकि वह खरा निकल कर जीवन का वह मुकुट पाएगा, जिस की प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम करने वालों को दी है.” (याकूब 1:12)
मनन के लिए वचन: “क्योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की, और मृत्यु की व्यवस्था से स्वतंत्र कर दिया.” (रोमियों 8:2)