सितम्बर 15 – आज ही के दिन से!
“‘क्या अब तक बीच खत्ते में है? अब तक दाखलता और अंजीर और अनार और जलपाई के वृक्ष नहीं फले, परन्तु आज के दिन से मैं तुम को आशीष देता रहूंगा.’” (हाग्गै 2:19)
भविष्यवक्ता हाग्गै प्रभु का वचन न केवल इस्राएल के लोगों तक, बल्कि आज हम तक भी पहुँचाते हैं. इस्राएल के उन लोगों को देखकर, जो बिना आशीष के, दर्द और आँसुओं के बीच जी रहे थे, उन्होंने घोषणा की, “आज ही के दिन से मैं तुम्हें आशीष दूँगा.” कितना आनंददायक संदेश है यह!
क्या आप जानते हैं कि प्रभु ने उन्हें आशीष देने का वादा कब किया था? उस दिन से जब उन्होंने परमेश्वर का भवन बनाना शुरू किया. असल में वे कह रहे थे, “मेरे भवन का निर्माण करो. मुझे इसमें खुशी मिलेगी; और इतना ही नहीं, मैं तुम्हें भी आशीष दूँगा.” प्रभु आपके भवन बनाने के संकल्प और उसे दिए जाने वाले महत्व और सम्मान को देखते हैं.
पवित्र शास्त्र में हम लोगों को वेदी बनाते हुए देखते हैं. मूसा ने पवित्र डेरा (तंबू) बनाया. सुलैमान ने प्रभु के लिए एक शानदार मंदिर बनाया. बाद में, एज्रा, नहेमायाह और जरुब्बाबेल ने मंदिर का पुनर्निर्माण किया. उन्होंने प्रभु की आशीष का अनुभव किया.
आज, जिस भवन का निर्माण हमको और आपको करना है, वह हमारा आत्मिक जीवन है. जिस प्रभु ने स्वर्ग और पृथ्वी की रचना की, वह इंसानी हाथों से बने भवनों में नहीं रहता. वह हमारे शरीरों को अपना मंदिर, अपना निवास स्थान, अपने प्रार्थना का घर और अपना परम पवित्र स्थान बनाता है. मसीह महिमा की आशा के रूप में हमारे भीतर वास करते हैं (कुलुस्सियों 1:27).
जब कोई व्यक्ति यह सोचने लगता है, “मुझे प्रभु के लिए एक मंदिर बनना है. मुझे पवित्र आत्मा के लिए एक योग्य निवास स्थान बनना है जो मेरे भीतर वास करते हैं,” और परिणामस्वरूप अपने प्रार्थना जीवन और परमेश्वर के वचन को पढ़ने पर अधिक ध्यान देता है, तो उस दिन से प्रभु निश्चित रूप से उसे आशीष देंगे. वे उसे न केवल सांसारिक मामलों में, बल्कि आत्मिक रूप से और स्वर्गीय राज्य से संबंधित चीजों में भी आशीष देंगे.
भविष्यवक्ता हाग्गै के दिनों में, जरुब्बाबेल ने बड़े उत्साह के साथ मंदिर की नींव रखी. उन्होंने अपने हाथ में नापने वाली डोरी ली और पुनर्निर्माण का काम शुरू किया. जब प्रभु ने यह देखा, तो उनका हृदय आनंद से भर गया. “‘सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है, उस दिन, हे शालतीएल के पुत्र मेरे दास जरूब्बाबेल, मैं तुझे ले कर अंगूठी के समान रखूंगा, यहोवा की यही वाणी है; क्योंकि मैं ने तुझी को चुन लिया है, सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है॥” (हाग्गै 2:23)
परमेश्वर के प्रिय लोगों, प्रभु आपको अपनी मुहर वाली अंगूठी बनाएगा. इसलिए, अपने आत्मिक जीवन को मज़बूत करे. अपने शरीर की पवित्रता की रक्षा करे, यह याद रखते हुए कि पवित्र आत्मा हमारे शरीर रूपी मंदिर में वास करता है.
जिस प्रकार राजा मुहर वाली अंगूठियाँ पहनते थे और उनका उपयोग शाही आदेशों और सरकारी कानूनों पर मुहर लगाने के लिए करते थे, उसी प्रकार राजाओं का राजा हमे अपनी मुहर वाली अंगूठी के रूप में इस्तेमाल करेगा. हमारा जीवन हमारे स्वर्गीय राजा के अधिकार, चरित्र और मुहर को प्रकट कर सकता है.
आज से—प्रभु हमे आशीष दे, हमको मज़बूत करे, और हमारे जीवन को अपनी उपस्थिति का निवास स्थान और अपने उद्देश्य की मुहर बनाए.
मनन करने के लिए वचन: “इस्राएली, अर्थात याजक लेवीय और और जितने बन्धुआई से आए थे उन्होंने परमेश्वर के उस भवन की प्रतिष्ठा उत्सव के साथ की. और अखमीरी रोटी का पर्व सात दिन तक आनन्द के साथ मनाते रहे; क्योंकि यहोवा ने उन्हें आनन्दित किया था, और अश्शूर के राजा का मन उनकी ओर ऐसा फेर दिया कि वह परमेश्वर अर्थात इस्राएल के परमेश्वर के भवन के काम में उनकी सहायता करे.” (एज्रा 6:16, 22)