Appam, Appam - Hindi

जून 30 – विनम्र बने।

“वह गाली सुन कर गाली नहीं देता था, और दुख उठा कर किसी को भी धमकी नहीं देता था, पर अपने आप को सच्चे न्यायी के हाथ में सौपता था. (1 पतरस 2:23).

एक बुज़ुर्ग महिला कलीसिया में प्रार्थना करती थी, “हे प्रभु, मैं तो बस एक कीड़ा और मकोड़ा हूँ. प्रभु, मैं तो धूल हूँ गंदी धूल.” एक नौजवान ने मज़ाक में उससे पूछा, “दादी माँ, क्या आप सच में एक कीड़ा हैं? क्या हर हफ़्ते यही प्रार्थना करती हैं? क्या यह सच्ची प्रार्थना है या बस खोखले शब्द हैं?”

वह बुज़ुर्ग महिला बहुत नाराज़ हो गई. “क्या तुमने मुझे दादी माँ कहा? क्या मैं इतनी बूढ़ी हूँ? क्या तुम मेरा मज़ाक उड़ा रहे हो?” उसने चिढ़कर कहा. उस नौजवान ने उसे और चिढ़ाया और कहा, “दादी माँ, आप कीड़ा या मकोड़ा नहीं हैं—आप तो एक साँप हैं, फुफकारने वाला साँप!” आस-पास के सभी लोग हँसने लगे.

हालाँकि कीड़े और साँप दोनों ज़मीन पर रहते हैं, लेकिन उनमें बहुत फ़र्क होता है. कीड़ा फुफकारता नहीं है. लेकिन जब साँप फुफकारता है, तो वह डरावनी आवाज़ निकालता है और दूसरों को डराता है. इसके उलट, कीड़ा चुपचाप विनम्रता और नम्रता से आगे बढ़ता है. अगर उसे कुचला भी जाए, तो वह कोई आवाज़ नहीं करता. कुचले जाने पर भी वह अपना मुँह नहीं खोलता. उसमें न तो गुस्सा होता है, न चिड़चिड़ाहट, और न ही बदला लेने की इच्छा.

मसीह को देखे, जो हमारे लिए एक आदर्श उदाहरण हैं. क्रूस पर भी वे कितने शांत रहे! बाइबल कहती है: “वह सताया गया, तौभी वह सहता रहा और अपना मुंह न खोला; जिस प्रकार भेड़ वध होने के समय वा भेड़ी ऊन कतरने के समय चुपचाप शान्त रहती है, वैसे ही उसने भी अपना मुंह न खोला.” (यशायाह 53:7).

जब भी दूसरे आपको उकसाएँ या गुस्सा दिलाएँ, तो हमारे प्रभु यीशु मसीह को याद करें. जब लोगों ने उन्हें क्रूस पर कीलों से जड़ा, तब भी उन्होंने कठोर या गुस्से भरे शब्द नहीं कहे. इसके बजाय, उन्होंने प्रार्थना की: “पिता, इन्हें माफ़ कर दे.”

क्रूस पर अपने दुख के ज़्यादातर समय वे चुप रहे. यहाँ तक कि जब उन्हें न्याय नहीं मिला, तब भी उन्होंने अपने अधिकारों के लिए बहस नहीं की.

अपने गुस्से और चिड़चिड़ाहट को क्रूस पर खत्म कर दे. उन्हें अपने अंदर पनपने मत दे. बाइबल कहती है: “और जो मसीह यीशु के हैं, उन्होंने शरीर को उस की लालसाओं और अभिलाषाओं समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है॥ यदि हम आत्मा के द्वारा जीवित हैं, तो आत्मा के अनुसार चलें भी. हम घमण्डी होकर न एक दूसरे को छेड़ें, और न एक दूसरे से डाह करें.” (गलातियों 5:24–26).

परमेश्वर के प्रिय लोगों, कभी-कभी हमारे अंदर साँप जैसा स्वभाव उभरने की कोशिश कर सकता है. जब भी ऐसा हो, तो प्रभु यीशु को याद करे और खुद को एक कीड़े के समान दीन-हीन बना ले. प्रभु यीशु से प्रार्थना करे वह हमे ऊँचा उठाएगा.

मनन के लिए वचन: “जैसा मसीह यीशु का स्वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्वभाव हो.” (फिलिप्पियों 2:5).

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