Appam, Appam - Hindi

जून 07 – मेरा ध्यान।

“अहा! मैं तेरी व्यवस्था में कैसी प्रीति रखता हूं! दिन भर मेरा ध्यान उसी पर लगा रहता है. (भजन संहिता 119:97)

राजा दाऊद, जिन्होंने एक शक्तिशाली सम्राट के रूप में इस्राएल पर राज किया, उन पर हज़ारों ज़िम्मेदारियाँ रही होंगी. अनगिनत समस्याओं ने उन्हें परेशान किया होगा. दुश्मनों और विरोधियों ने उन्हें लगातार धमकाया होगा. फिर भी, इन सब बातों के बीच, उन्होंने खुशी से घोषणा की: “दिन भर मेरा ध्यान उसी पर लगा रहता है.”

जब परमेश्वर के भक्त टाइंडेल ने अपने अनुभव के बारे में लिखा, तो उन्होंने कहा: “हमारे घरों में, जब खिड़कियों के पर्दे गिरा दिए जाते थे, तो हमारे पूर्वज आँसुओं के साथ बाइबल पढ़ते थे. यहाँ तक कि जब आँसुओं के कारण शब्द धुंधले हो जाते थे, तब भी यह आत्मा की दृष्टि में जान डाल देता था. जब व्यापार ठप हो जाता था, जब काम-धंधा चौपट हो जाता था, और जब अंधकार और निराशा हमें घेर लेती थी, तब मेरे पूर्वजों की एकमात्र आशा बाइबल ही होती थी.

साथ ही, खुशी, आनंद और समृद्धि के समय में भी, यही बाइबल उनका मार्गदर्शन करती थी. यह हमेशा हमारे लिए एक हरे-भरे, सींचे हुए बगीचे की तरह रही है.”

दाऊद कहते हैं, “प्रभु का नियम दिन भर मेरा ध्यान है.” लेकिन हमें परमेश्वर के वचन पर किस तरह ध्यान करना चाहिए?

एक सुंदर बगीचा था जो सुगंधित फूलों से भरा हुआ था. सबसे पहले, एक स्त्री वहाँ आई. उसने एक प्यारा फूल देखा, उसे तोड़ा, उसे सूंघा, और अपने बालों में लगा लिया. कुछ ही मिनटों में, वह मुरझा गया और सूख गया.

फिर एक तितली आई. वह हर फूल पर बस एक पल के लिए बैठी और उड़ गई.

उसके बाद, एक मधुमक्खी उड़ती हुई आई. वह एक फूल पर बैठी, उसके भीतर गहराई तक गई, शहद पिया, अपने पैरों पर पराग इकट्ठा किया, उसे अपने भीतर सँजोया, और वापस अपने छत्ते की ओर उड़ गई.

जब बाइबल पढ़ने की बात आती है, तो क्या हम भी उस मधुमक्खी की तरह हैं?

कुछ लोग तेज़ी से पढ़ते हैं और आगे बढ़ जाते हैं. दूसरे लोग केवल उसी एक वादे को थामे रहते हैं जो उनकी ज़रूरत के हिसाब से सही बैठता है. लेकिन कुछ ऐसे भी लोग हैं जो बड़ी उत्सुकता से परमेश्वर के वचन के पास बैठते हैं, उन शब्दों का रसपान करते हैं जो शहद और मधुछत्ते से भी ज़्यादा मीठे हैं, और फिर दूसरों के आशीष के लिए उन्हें उनके साथ बाँटते हैं. दाऊद भजन संहिता की किताब में कहते हैं: “परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से प्रसन्न रहता; और उसकी व्यवस्था पर रात दिन ध्यान करता रहता है. वह उस वृक्ष के समान है, जो बहती नालियों के किनारे लगाया गया है. और अपनी ऋतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुरझाते नहीं. इसलिये जो कुछ वह पुरूष करे वह सफल होता है॥” (भजन संहिता 1:2-3)

परमेश्वर के प्रिय लोगों, पवित्र शास्त्र को बड़े उत्साह से पढ़े! बाइबल को एक अनमोल पत्र समझे, जिसे प्रभु ने स्वयं हमारे लिए लिखा है, और इसे पूरे हृदय से ग्रहण करे.

मनन के लिए वचन: “वे तो सोने से और बहुत कुन्दन से भी बढ़कर मनोहर हैं; वे मधु से और टपकने वाले छत्ते से भी बढ़कर मधुर हैं.” (भजन संहिता 19:10)

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