Appam, Appam - Hindi

जून 05 – चुप रहना।

“मैं मौन धारण कर गूंगा बन गया, और भलाई की ओर से भी चुप्पी साधे रहा; और मेरी पीड़ा बढ़ गई. (भजन संहिता 39:2)

सभोपदेशक कहता है कि “चुप रहने का एक समय होता है, और बोलने का एक समय होता है” (सभोपदेशक 3:7). जब चुप रहने का समय हो, तो हमें सचमुच चुप रहना चाहिए.

कैथोलिक चर्च में, कुछ ऐसे मठ हैं जिन्हें ‘मौन मठ’ के नाम से जाना जाता है. वहाँ के भिक्षु किसी से बात नहीं करते और कई महीनों तक चुप रहते हैं. जब मैं इज़राइल गया था, तो मैंने क्रेत नाले के पास ऐसा ही एक मठ देखा था, जहाँ एलिय्याह ने खुद को छिपाया था. जिस तरह एलिय्याह क्रेत नाले के पास चुप रहा था, उसी तरह इन भिक्षुओं ने भी खुद को मौन होने के लिए समर्पित कर दिया था.

जब हम पुराने नियम को पढ़ते हैं, तो हम देखते हैं कि जो लोग अपने पापों पर शोक मनाते थे, वे चुपचाप बैठते थे, अपने सिर पर धूल या राख डालते थे, टाट के कपड़े पहनते थे, और उन दिनों को शुद्धिकरण के समय के रूप में बिताते थे.

बाइबल कहती है: “सिय्योन की पुत्री के पुरनिये भूमि पर चुपचाप बैठे हैं; उन्होंने अपने सिर पर धूल उड़ाई और टाट का फेंटा बान्धा है; यरूशलेम की कुमारियों ने अपना अपना सिर भूमि तक झुकाया है.” (विलापगीत 2:10)

प्रभु उस उपवास और मौन को देखते हैं जिसके द्वारा हम खुद को दीन बनाते हैं. वह तब परमेश्वर हमारी स्थिती को बदल देते हैं और हमारे आँसुओं को खुशी में बदल देते हैं.

दाऊद ने भी अपने जीवनकाल में मौन के महत्व को समझा था. अपने शांत पलों में, वह परमेश्वर के वचन को पढ़ता था और शांति से ध्यान करता था. वह मौन ध्यान के लिए एक उपयुक्त वातावरण बन गया था. यह दुनिया के शोर को दूर करने और प्रभु की आवाज़ सुनने के लिए अपने दिल के दरवाज़े खोलने का समय था. ऐसे पलों के दौरान, उसकी आत्मा उसके अंदर जल उठती थी.

आज, कई तरह के शोर और विज्ञापन लगातार हमारे कानों में गूँजते रहते हैं. ये आवाज़ें लोगों के जीवन को सांसारिक इच्छाओं के अनुसार ढालती हैं. क्योंकि हमारे कान लगातार शोर से भरे रहते हैं, इसलिए हम अक्सर परमेश्वर की आवाज़ सुनने के लिए जगह नहीं बना पाते.

प्रभु की आवाज़ सुनने के लिए कुछ शांत पल अलग से निकालें. प्रभु के चरणों में शांति से बैठें और उनके महिमामय चेहरे को निहारें.

एक बार, एक पापी स्त्री प्रभु यीशु के पास आई. उसने अपने आँसुओं से उनके पैरों को भिगो दिया. उसके मुँह से एक भी शब्द नहीं निकला; उसकी आँखों से केवल आँसू बह रहे थे. प्रभु ने उसके पाप क्षमा कर दिए और प्रेम से कहा: “बेटी, तेरे पाप क्षमा हो गए.”

परमेश्वर के प्रिय लोगों, प्रभु के प्रती समर्पित हृदय हमारे जीवन में आशीष लाएगा.

मनन के लिए वचन: “परन्तु यहोवा अपने पवित्र मन्दिर में है; समस्त पृथ्वी उसके साम्हने शान्त रहे.” (हबक्कूक 2:20)

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