मई 26 – एक चुनी हुई पीढ़ी।
“पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की ) निज प्रजा हो, इसलिये कि जिस ने तुम्हें अन्धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो.” (1 पतरस 2:9)
जब हम परमेश्वर के वचन को बार-बार पढ़ते हैं, तो हम यह समझना शुरू कर देते हैं कि हम कौन हैं और परमेश्वर का हमारे लिए क्या उद्देश्य है—और हम उसकी महिमा करने के लिए प्रेरित होते हैं. परमेश्वर की दृष्टि में, हम हैं: एक चुनी हुई पीढ़ी; एक राजसी याजक-पद; एक पवित्र जाति; और उसके अपने विशेष लोग.
पुराने नियम में, परमेश्वर ने इस्राएल को—यानी अब्राहम के वंशजों को—अपने लोगों के रूप में चुना. उसने:
* उन्हें वादे दिये.
* उनके साथ एक वाचा (करार) बाँधी.
* उनके बीच से अगुवे खड़े किए.
* उनके लिए युद्ध लड़े.
* उनके सामने से अन्य जातियों को भगा दिया.
* उन्हें वह देश दिया जिसमें दूध और मधु की नदियाँ बहती थीं.
यह सब इसलिए हुआ क्योंकि वे परमेश्वर के चुने हुए लोग थे.
नए नियम में, परमेश्वर ने हमें मसीह में चुना है. उसने:
* हमारे लिए अपना कीमती लहू बहाया है.
* हमें पापों की क्षमा दी है.
* हमें उद्धार का आनंद प्रदान किया है.
* अपने लहू के द्वारा हमारे साथ एक वाचा बाँधी है.
* हमें स्वर्गीय राज्य का वादा किया है.
* वह प्रेमपूर्वक हमें अनंत जीवन की ओर ले जाना चाहता है.
जब दाऊद को यह एहसास हुआ कि परमेश्वर ने उसे चुना है—भले ही वह अपने ही परिवार में एक साधारण और महत्वहीन व्यक्ति था—तो उसका हृदय कृतज्ञता से भर गया. उसने कहा: “मैं यहोवा को उसके सारे उपकारों का क्या बदला दूँ?”, और उसने आगे कहा: “मैं उद्धार का कटोरा उठाऊँगा और यहोवा के नाम को धन्य कहूँगा”
परमेश्वर का चुनना सचमुच अद्भुत है. कुछ लोग कठिन परिस्थितियों में चुने जाते हैं; कुछ तो जन्म से भी पहले; और कुछ अन्य तो संसार की नींव पड़ने से भी पहले.
वह निर्बलों को चुनता है ताकि बलवानों को लज्जित कर सके; साधारण लोगों को चुनता है ताकि बुद्धिमानों को लज्जित कर सके; और उन लोगों को चुनता है जो दीन और ठुकराए हुए हैं.
जैसा कि पतरस लिखता है: “और परमेश्वर पिता के भविष्य ज्ञान के अनुसार, आत्मा के पवित्र करने के द्वारा आज्ञा मानने, और यीशु मसीह के लोहू के छिड़के जाने के लिये चुने गए हैं. तुम्हें अत्यन्त अनुग्रह और शान्ति मिलती रहे॥” (1 पतरस 1:2)
परमेश्वर के प्रिय लोगों, भले ही संसार आपको एक अजनबी या बाहरी व्यक्ति कहे, आप हमेशा ये याद रखे कि आप सर्वोच्च परमेश्वर द्वारा चुने हुए है.
मनन के लिए वचन: “तुम भी आप जीवते पत्थरों की नाईं आत्मिक घर बनते जाते हो, जिस से याजकों का पवित्र समाज बन कर, ऐसे आत्मिक बलिदान चढ़ाओ, जो यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर को ग्रहण हों.” (1 पतरस 2:5)