Appam, Appam - Hindi

जून 16 – परन्तु यीशु।

“तब महायाजक ने खड़े होकर उस से कहा, क्या तू कोई उत्तर नहीं देता? ये लोग तेरे विरोध में क्या गवाही देते हैं? परन्तु यीशु चुप रहा: महायाजक ने उस से कहा. मैं तुझे जीवते परमेश्वर की शपथ देता हूं, कि यदि तू परमेश्वर का पुत्र मसीह है, तो हम से कह दे. (मत्ती 26:62-63)

यहाँ हम देखते हैं कि प्रभु यीशु ने चुप रहकर जवाब दिया. बहुत से लोगों ने उनके विरुद्ध झूठी गवाही दी. फिर भी, महायाजक के सामने खड़े होकर यीशु ने अपनी सच्चाई साबित करने या खुद को सही ठहराने की कोशिश नहीं की. वे चुप रहे.

बाइबल कहती है: “फाड़ने का समय, और सीने का भी समय; चुप रहने का समय, और बोलने का भी समय है;” (सभोपदेशक 3:7)

यीशु ने जंगल में परमेश्वर के वचन का प्रचार किया. उन्होंने आराधनालयों में सिखाया. जब वे पहाड़ पर खड़े हुए, तो भीड़ उनके सामने जमा हो गई, और उन्होंने अपना मुँह खोलकर उन्हें सिखाया.

लेकिन जब व्यभिचार में पकड़ी गई स्त्री को उनके सामने लाया गया और उस पर कई आरोप लगाए गए, तो वे चुपचाप नीचे झुके और ज़मीन पर लिखने लगे. जब लोगों ने उनसे सवाल करना जारी रखा, तब उन्होंने कहा: “जब वे उस से पूछते रहे, तो उस ने सीधे होकर उन से कहा, कि तुम में जो निष्पाप हो, वही पहिले उस को पत्थर मारे.” (यूहन्ना 8:7). फिर वे फिर से चुप हो गए. जो लोग उसे पत्थर मारने आए थे, वे चुपचाप चले गए.

कभी-कभी, शांत या चुप रहना ही एक शक्तिशाली हथियार बन जाता है. ऐसे लोग हुए हैं जिन्होंने शांत या चुप रह कर महान काम किए.

जाने-माने थॉमस ए केम्पिस ने अपनी किताब ‘द इमिटेशन ऑफ़ क्राइस्ट’ की प्रस्तावना में लिखा: “चुप रहना मेरा दोस्त है; प्रार्थना मेरी साथी है.” एक और परमेश्वर-भक्त ने कहा, “लोगों के साथ अपनी बातचीत कम करो; परमेश्वर के साथ अपनी बातचीत बढ़ाओ.”

क्या आप जानते हैं कि राजा दाऊद ने क्या अनुभव किया? “मैं ने कहा, मैं अपनी चाल चलन में चौकसी करूंगा, ताकि मेरी जीभ से पाप न हो; जब तक दुष्ट मेरे साम्हने है, तब तक मैं लगाम लगाए अपना मुंह बन्द किए रहूंगा. मैं मौन धारण कर गूंगा बन गया, और भलाई की ओर से भी चुप्पी साधे रहा; और मेरी पीड़ा बढ़ गई,” (भजन संहिता 39:1 -2)

इसका नतीजा क्या हुआ? अगली आयत कहती है: “मेरा हृदय अन्दर ही अन्दर जल रहा था. सोचते सोचते आग भड़क उठी; तब मैं अपनी जीभ से बोल उठा;” (भजन संहिता 39:3)

जब हम चुप रहते हैं, तो प्रभु हमारी ओर से बोलेंगे. वे हमारा पक्ष रखेंगे और हमारी लड़ाइयाँ लड़ेंगे. प्रभु कहते हैं:

“सिय्योन के निमित्त मैं चुप न रहूंगा, और यरूशलेम के निमित्त मैं चैन न लूंगा, जब तक कि उसकी धामिर्कता प्रकाश की नाईं और उसका उद्धार जलते हुए पलीते के समान दिखाई न दे.” (यशायाह 62:1)

परमेश्वर के प्रिय लोगों, हमें ये समझना और जानना है कि हम अपना सारा बोझ सारी चिंता बातों को प्रभु यीशु के सम्मुख लाये क्योंकि उसको हमारी चिंता है. आज ये प्रश्न आपसे है कि, क्या आप उन्हें अपनी लड़ाइयाँ लड़ने का अवसर देंगे?

प्रभु ने हमारे जीवन की सभी बातों की ज़िम्मेदारी ले ली है. वह हमारे लिए सब कुछ पूरा करेंगे.

मनन करने के लिए वचन: “परन्तु यहोवा अपने पवित्र मन्दिर में है; समस्त पृथ्वी उसके साम्हने शान्त रहे॥” (हबक्कूक 2:20)

Leave A Comment

Your Comment
All comments are held for moderation.