जून 24 – हमारी शरण।
“अनादि परमेश्वर तेरा गृहधाम है, और नीचे सनातन भुजाएं हैं. वह शत्रुओं को तेरे साम्हने से निकाल देता, और कहता है, उन को सत्यानाश कर दे॥” (व्यवस्थाविवरण 33:27).
प्रभु हमारी शरण है. यह शरण कोई साधारण शरण नहीं है — यह बहुत ही शानदार शरण है. देखिए मूसा, जो परमेश्वर का सेवक था, कैसे कहता है: “अनंत परमेश्वर ही तुम्हारी शरण है.” धन्य है वह मनुष्य जो प्रभु की शरण में रहता है.
एक बार मैं श्रीलंका के एक पादरी से मिला. उनकी आँखों में आँसू थे और उन्होंने कहा, “कई बार श्रीलंकाई सेना ने मुझे गोली मारने की कोशिश की, लेकिन हथियारों से गोलियाँ कभी निकली ही नहीं. उन्होंने हेलीकॉप्टर से हमारे चर्च पर बड़े-बड़े बम गिराए. बम गिरे तो सही, लेकिन फटे नहीं. अनंत परमेश्वर ही हमारी शरण था.”
हम जिस दुनिया में रहते हैं, वह खतरनाक है. हम अंदाज़ा नहीं लगा सकते कि कब खतरा आ जाए. जादू-टोना, बुरी हरकतें, संक्रामक बीमारियाँ और दुर्घटनाएँ हर समय हमारे आस-पास रहती हैं. फिर भी हमें उनसे डरने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि अनंत परमेश्वर ही हमारी शरण है.
दाऊद को देखिए! उसके कितने दुश्मन थे! भेड़-बकरियाँ चराते समय शेर, भालू और भेड़िये उस पर हमला करने आते थे. लेकिन चूँकि दाऊद प्रभु की शरण में रहता था, इसलिए वे उसे नुकसान नहीं पहुँचा सके. इसके बजाय, दाऊद ने उनका सामना किया और उन्हें मार गिराया.
“शरण” शब्द का अर्थ है सुरक्षा. प्रभु दाऊद के लिए एक ऊँची शरण बन गए; उन्होंने न केवल शाऊल के हाथों से, बल्कि पलिस्तियों और मिद्यानियों जैसे दुश्मनों से भी उसकी रक्षा की और उसे अपनी पनाह में सुरक्षित रखा.
क्या आप मसीह की शरण की महानता को समझना चाहते हैं? मुर्गी के पंखों के नीचे छिपे चूजों को देखिए. उन्हें कितना सुकून और आराम मिलता है!
पंखों के नीचे छिपे चूजे अपने छोटे-छोटे सिर ऊपर उठाते हैं और चंचलता से चारों ओर देखते हैं. उन्हें कौवों, गिद्धों या बाज़ों की कोई चिंता नहीं होती. चाहे कोई भी खतरा आए, वे जानते हैं कि उनकी माँ उनकी रक्षा करेगी.
परमेश्वर के प्रिय लोगों, “जो परमप्रधान के छाए हुए स्थान में बैठा रहे, वह सर्वशक्तिमान की छाया में ठिकाना पाएगा. मैं यहोवा के विषय कहूंगा, कि वह मेरा शरणस्थान और गढ़ है; वह मेरा परमेश्वर है, मैं उस पर भरोसा रखूंगा. वह तो तुझे बहेलिये के जाल से, और महामारी से बचाएगा;” (भजन संहिता 91:1–3).
मनन करने के लिए वचन: “जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई. सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है॥” (भजन संहिता 46:6-7).