जून 01 – वह कभी नहीं छोड़ेगा।
“तेरे जीवन भर कोई तेरे साम्हने ठहर न सकेगा; जैसे मैं मूसा के संग रहा वैसे ही तेरे संग भी रहूंगा; और न तो मैं तुझे धोखा दूंगा, और न तुझ को छोडूंगा.” (यहोशू 1:5)
परमेश्वर के सभी वादों में से, यह वादा विशेष रूप से अनमोल है. जिस परमेश्वर ने यह वादा यहोशू से किया था, उसने लगभग 1300 वर्ष बाद भी इसे फिर से दोहराया. प्रेरित पौलुस हमें इसी भरोसे की याद दिलाते हैं: “क्योंकि उसने स्वयं कहा है, ‘मैं तुझे कभी नहीं छोडूंगा और न ही कभी त्यागूंगा.’” (इब्रानियों 13:5)
हाँ, परमेश्वर के वादे उसके लोगो के लिए हमेशा के लिए हैं. हो सकता है कि हम उस पर अपनी पकड़ ढीली कर दें; हो सकता है कि हम उससे दूर चले जाने के बारे में भी सोचें. लेकिन प्रभु कभी भी हम पर से अपनी प्रेमपूर्ण पकड़ नहीं छोड़ता, और न ही वह कभी हमसे दूर जाता है.
जब कोई किसी छोटे लड़के को तैरना सिखाता है, तो वह बच्चे की कमर के चारों ओर एक मज़बूत रस्सी बाँध देता है और उसका दूसरा सिरा किनारे से मज़बूती से पकड़े रहता है. बच्चा पानी में तैरना शुरू कर देता है, जबकि सिखाने वाला किनारे पर सुरक्षित खड़ा होकर रस्सी पकड़े रहता है. अगर रस्सी बहुत ज़्यादा कसी हुई रखी जाए, तो लड़का कभी तैरना नहीं सीख पाएगा.
इसलिए, सिखाने वाला रस्सी को थोड़ा ढीला छोड़ता है और देखता है कि क्या बच्चा तैर पा रहा है. कभी-कभी लड़का ठीक से तैरता है, लेकिन कभी-कभी वह डूबने लगता है. फिर भी, रस्सी पकड़े हुए व्यक्ति उसे कभी डूबने नहीं देता. जिस पल वह देखता है कि बच्चा डूब रहा है, वह तुरंत रस्सी खींचता है और उसे फिर से ऊपर उठा लेता है. डरा हुआ बच्चा आश्वस्त हो जाता है जब सिखाने वाला कहता है, “मैंने तुझे नहीं छोड़ा है. मैंने तुझे नहीं त्यागा है. मैंने तुझे अपने हाथ में मज़बूती से पकड़ा हुआ है.” यह बात उस बच्चे को कितना सुकून और खुशी देती है!
इसी तरह, हमारे आध्यात्मिक जीवन में भी, प्रभु हमें सीखने और आगे बढ़ने के अवसर देता है. कभी-कभी, वह रस्सी को थोड़ा ढीला छोड़ देता है. उन पलों में हम शायद चिल्ला उठें, “प्रभु ने मुझे छोड़ दिया है! परमेश्वर मेरी प्रार्थनाएँ नहीं सुन रहा है!” लेकिन असल में, प्रभु ने हमें प्रेम की डोर से अपने साथ बाँध रखा है.
परमेश्वर के प्रिय लोगों, प्रभु का प्रेम लगातार हमारा पीछा करता रहता है. खोई हुई भेड़ को खोजने वाले चरवाहे की तरह, वह हमें खोजता है. अपना खोया हुआ चाँदी का सिक्का मिलने पर खुश होने वाली स्त्री की तरह, वह हमारे मिलने पर खुश होता है. जैसे कोई पिता अपने भटके हुए बेटे के लौटने का इंतज़ार करता है, वैसे ही वह भी बेसब्री से हमारा इंतज़ार करता है. वह प्यार से हमें गले लगाता है और कहता है, “मै ना तुझे कभी छोडूंगा और ना कभी त्यागुगा”
मनन करने के लिए वचन: “और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्त तक सदैव तुम्हारे संग हूं॥” (मत्ती 28:20)