Appam, Appam - Hindi

जुलाई 04 – बादल से आई एक आवाज़।

“और उस बादल में से यह शब्द निकला, कि यह मेरा पुत्र और मेरा चुना हुआ है, इस की सुनो. (लूका 9:35).

एक बार, यीशु अपने तीन शिष्यों—पतरस, यूहन्ना और याकूब—को प्रार्थना करने के लिए एक पहाड़ पर ले गए. वहाँ, उनका रूप बदल गया. उनका चेहरा सूरज की तरह चमकने लगा और उनके कपड़े रोशनी की तरह चमकदार सफ़ेद हो गए. मूसा और एलिय्याह भी महिमा के साथ प्रकट हुए और उनसे बातें कीं.

उस समय, पतरस ने यीशु से कहा: “…हे स्वामी, हमारा यहां रहना भला है: सो हम तीन मण्डप बनाएं, एक तेरे लिये, एक मूसा के लिये, और एक एलिय्याह के लिये. वह जानता न था, कि क्या कह रहा है.” (लूका 9:33).

तब स्वर्ग से एक आवाज़ सुनाई दी: “यह मेरा प्रिय पुत्र है. इसकी सुनो!” (मत्ती 17:5). इसी तरह, जब यीशु का बपतिस्मा हुआ, तो “अचानक स्वर्ग से एक आवाज़ आई, ‘यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिससे मैं बहुत प्रसन्न हूँ.’” (मत्ती 3:17).

यहाँ, मूसा ने व्यवस्था (कानून) का प्रतिनिधित्व किया. इसलिए, इस्राएलियों ने मूसा की आवाज़ सुनी. एलिय्याह ने नबियों का प्रतिनिधित्व किया, और लोगों ने उनके नबी-संबंधी वचनों पर ध्यान दिया. वे दोनों पुराने नियम के युग के थे.

लेकिन अब नए नियम की कृपा का युग शुरू हो गया था. स्वर्ग ने स्वयं मसीह का सम्मान किया और घोषणा की, “इसकी सुनो!”

चाहे मूसा और एलिय्याह कितने भी महिमामय क्यों न रहे हों, और उन्होंने ‘रूपांतरण के पहाड़’ पर कुछ भी कहा हो, उनमें से किसी ने भी आपके लिए अपनी जान नहीं दी. केवल मसीह ने हमारे लिए अपनी जान दी. मसीह ही वह न्यायकर्ता हैं जो आने वाले हैं. इसलिए, उनकी आवाज़ ही हमारे लिए सबसे ज़्यादा ध्यान की हकदार है.

इस सांसारिक जीवन में, हमें कई आवाज़ें सुननी पड़ सकती हैं. फिर भी सबसे ऊपर, हमें प्रभु की आवाज़ सुननी चाहिए. हमें ऐसी किसी भी आवाज़ के आगे नहीं झुकना चाहिए जो उनकी इच्छा के विरुद्ध हो.

एक परमेश्वर-भक्त युवती की शादी उसके माता-पिता ने एक ऐसे सेना अधिकारी से कर दी जो शराब पीने की लत से जूझ रहा था. वह अक्सर अपनी शामें शराब पीने और साथी अधिकारियों के साथ पार्टियों में बिताता था. एक दिन, उसने अपनी पत्नी से कहा कि वह मेहमानों को शराब परोसे और उनके साथ डांस करे.

उसने मना कर दिया. तब पति ने उसे बाइबल की उस शिक्षा की याद दिलाई कि पत्नी को अपने पति के अधीन रहना चाहिए. लेकिन उसने जवाब दिया: “पत्नियों, अपने ही पतियों के अधीन रहो, जैसे प्रभु के अधीन रहती हो.” (इफिसियों 5:22). उसने दृढ़ता से कहा, “धर्मशास्त्र सिखाता है कि प्रभु के प्रति अधीनता ज़रूरी है. मैं आपकी बात तब नहीं मान सकती जब आपकी माँग प्रभु की इच्छा के विरुद्ध हो और उन्हें दुखी करती हो.”

परमेश्वर के प्रिय लोगों, पवित्र जोश और भक्ति के साथ स्वर्ग से आने वाली आवाज़ का पालन करे. ऐसा करने पर, हमको न केवल कुछ समय के लिए, बल्कि हमेशा-हमेशा के लिए आशीष मिलेगी.

मनन के लिए वचन: “तब उन्होंने अपनी आंखे उठाकर यीशु को छोड़ और किसी को न देखा.” (मत्ती 17:8).

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