अगस्त 09 – समृद्धि।
“यहोवा निर्धन करता है और धनी भी बनाता है, वही नीचा करता और ऊंचा भी करता है.” (1 शमूएल 2:7)
अपनी स्तुति के गीत में, हन्ना ने प्रभु की पवित्रता की सुंदरता, उनकी दिव्य बुद्धि और जीवन देने वाली शक्ति की प्रशंसा की. यहाँ, वह प्रभु से मिलने वाली समृद्धि और धन-दौलत का भी गुणगान करती हैं.
इस दुनिया में जीवन जीने के लिए पैसे की ज़रूरत होती है. तमिलनाडु में हुए एक संत तिरुवल्लुवर ने कहा था, “भौतिक संसाधनों के बिना, कोई भी इस दुनिया में नहीं रह सकता.” हमें भोजन, कपड़े और रहने की जगह के लिए पैसे की ज़रूरत होती है. प्रभु के काम के लिए भी आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होती है.
हमारे परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी के महान रचयिता और स्वामी हैं. चाँदी उनकी है, और सोना भी उनका है. उनमें आपको समृद्ध बनाने और ऊपर उठाने की शक्ति है. जब आप सबसे पहले परमेश्वर के राज्य और उसकी धार्मिकता की खोज करते हैं, तो वह ये सभी अन्य चीज़ें भी आपको प्रदान करेंगे.
इसहाक ने ज़मीन में बीज बोया, और चूँकि प्रभु उसके साथ थे और उन्होंने उसे आशीष दी, इसलिए उसने सौ गुना फ़सल काटी. इसहाक के परमेश्वर ही आपके परमेश्वर हैं. वह आपकी आय को बहुत अधिक बढ़ा सकते हैं. वह आपको आपकी वर्तमान परिस्थितियों से कहीं आगे – यहाँ तक कि हज़ार गुना – आशीष दे सकते हैं और ऊँचा उठा सकते हैं.
यदि आप प्रभु की भरपूर आशीषें पाना चाहते हैं, तो उन्हें उदारतापूर्वक और पूरे मन से दें. पवित्र शास्त्र कहता है: “उसने उदारता से दरिद्रों को दान दिया, उसका धर्म सदा बना रहेगा और उसका सींग महिमा के साथ ऊंचा किया जाएगा.” (भजन संहिता 112:9)
बाइबल यह भी कहती है: “जो कंगाल पर अनुग्रह करता है, वह यहोवा को उधार देता है, और वह अपने इस काम का प्रतिफल पाएगा.” (नीतिवचन 19:17)
कुछ लोग इसलिए अमीर बन जाते हैं क्योंकि वे उदारतापूर्वक देते हैं, जबकि दूसरे कंजूसी के कारण गरीबी में गिर जाते हैं. जैसा कि पवित्र शास्त्र चेतावनी देता है: “जो निर्धन को दान देता है उसे घटी नहीं होती, परन्तु जो उस से दृष्टि फेर लेता है वह शाप पर शाप पाता है.” (नीतिवचन 28:27)
आज, कुछ लोग अनाथालय, बाइबल कॉलेज, बुजुर्गों के लिए घर और विधवाओं की देखभाल करने वाले सेवा को चलाने के लिए विदेशों से आर्थिक सहायता प्राप्त करते हैं. ये सभी सराहनीय कार्य हैं. दुख की बात है कि हर कोई ऐसे संसाधनों के प्रबंधन में ईमानदार नहीं रहता है. मसीह ने कहा, “जो तुम्हारे पास है उसे बेच दो और गरीबों में बांट दो.” चाहे आप गरीबों को दान दो या प्रभु को भेंट चढ़ाओ, आपके दान सच्चे त्याग और दिल से निकली दया की भावना से भरा होना चाहिए. आप जो कुछ भी करे, उसे पूरे मन से प्रभु के लिए करे, न कि सिर्फ़ लोगों की तारीफ़ पाने के लिए.
यीशु ने सिखाया: “दिया करो, तो तुम्हें भी दिया जाएगा: लोग पूरा नाप दबा दबाकर और हिला हिलाकर और उभरता हुआ तुम्हारी गोद में डालेंगे, क्योंकि जिस नाप से तुम नापते हो, उसी से तुम्हारे लिये भी नापा जाएगा॥” (लूका 6:38)
मनन करने के लिए वचन: “वह चट्टानों के गढ़ों में शरण लिए हुए रहेगा; उसको रोटी मिलेगी और पानी की घटी कभी न होगी॥” (यशायाह 33:16)