Appam, Appam - Hindi

अक्टूबर 08 – आकाश के पक्षी।

“आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्हारा स्वर्गीय पिता उन को खिलाता है; क्या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते.” (मत्ती 6:26)

जब मैंने पहली बार पक्षी का घोंसला देखा, तो मैं यह देखकर हैरान रह गया कि ये छोटे पक्षी कितनी शानदार तरीके से अपने घोंसले बनाते हैं. उन्हें देखकर मुझे याद आया कि मुझे भी स्वर्ग में अपना घर बहुत अच्छे से और सावधानी से बनाना चाहिए.

पक्षी दुनिया के कई हिस्सों में पाए जाते हैं. वे अपनी चोंच और पैरों का इस्तेमाल करके बहुत तेज़ी से अपने घोंसले बनाते हैं. वे रेशों, घास, पत्तियों और दूसरी प्राकृतिक चीज़ों का इस्तेमाल करते हैं. उनके घोंसले आम तौर पर ज़मीन से कुछ ऊंचाई पर बनाए जाते हैं, जिससे उन्हें खतरों से सुरक्षा मिलती है.

ये पक्षी अपने बच्चों और उनकी सुरक्षा को लेकर बहुत फिक्रमंद रहते हैं. भले ही उनके घोंसले उल्टे लटके हुए दिखें, लेकिन उनके अंदर एक अलग कमरा होता है जहाँ उनके बच्चे सुरक्षित रहते हैं.

पक्षियों की कुछ किस्में मिल-जुलकर रहने वाली होती हैं. जब एक पक्षी घोंसला बनाना शुरू करता है, तो दूसरे पक्षी आकर अलग-अलग तरह से मदद करते हैं. कुछ मौसमों में, एक ही महीने में सैकड़ों घोंसले देखे जा सकते हैं.

ये मिलनसार पक्षी हैं जो शाम को एक साथ इकट्ठा होते हैं, गाते हैं और खुशियाँ मनाते हैं. जैसे परमेश्वर के लोग सृष्टि के अजूबों को देखते और उनकी सराहना करते हैं, वैसे ही हम इन पक्षियों को देखकर प्रभु के नाम की महिमा कर सकते हैं.

कुछ देशों में, नर पक्षी तीन या चार घोंसले बनाता है और उन्हें मादा के सामने पेश करता है. मादा अपनी पसंद का घोंसला चुनती है, और फिर वे दोनों वहाँ अपना घर बनाते हैं, अंडे देते हैं और अपने बच्चों को पालते हैं. बाकी घोंसले बाद में छोड़ दिए जाते हैं या तोड़ दिए जाते हैं.

इन पक्षियों को इतने सुंदर और जटिल घर बनाने की समझ और हुनर किसने दिया? यह हमारे प्रभु परमेश्वर ने दिया है. “उसके हाथ में एक एक जीवधारी का प्राण, और एक एक देहधारी मनुष्य की आत्मा भी रहती है.” (अय्यूब 12:10)

जब दुश्मन इन पक्षियों को धमकाते हैं, तो वे एक साथ मिलकर दुश्मन को भगा देते हैं. जब साँप उनके घोंसलों की ओर चढ़ने की कोशिश करते हैं, तो पक्षी मिलकर शोर मचाते हैं और साँपों को दूर रखने और अपने अंडों व बच्चों की रक्षा करने के लिए हर संभव तरीका अपनाते हैं. मसीही होने के नाते, हमारा प्यार, एकता और साथ मिलकर रहना हमारे लिए प्राथमिकता होनी चाहिए.

परमेश्वर के प्रिय लोगों, जैसे पक्षी अपने बच्चों की देखभाल और सुरक्षा करते हैं, वैसे ही प्रभु हम पर अपने पंख फैलाते हैं, हमें छुड़ाते हैं और सुरक्षित रखते हैं. वे हमें हर तरह की बुराई से बचाते हैं. चाहे वह दिन में उड़ने वाला तीर हो, अंधेरे में फैलने वाली महामारी हो, या दोपहर में तबाही मचाने वाला विनाश हो, प्रभु हमें अपने पंखों के नीचे छिपाते हैं और अपनी आँख की पुतली की तरह हमारी रक्षा करते हैं.

मनन के लिए वचन: “पंख फैलाई हुई चिडिय़ों की नाईं सेनाओं का यहोवा यरूशलेम की रक्षा करेगा; वह उसकी रक्षा कर के बचाएगा, और उसको बिन छूए ही उद्धार करेगा॥ ” (यशायाह 31:5)

Leave A Comment

Your Comment
All comments are held for moderation.