अगस्त 26 – पाँच ओसारे।
” यरूशलेम में भेड़-फाटक के पास एक कुण्ड है जो इब्रानी भाषा में बेतहसदा कहलाता है, और उसके पांच ओसारे हैं. ” (यूहन्ना 5:2)
आज, मैं आपको इज़राइल देश में बेतेसदा कुंड ले जाना चाहता हूँ. उस दृश्य की कल्पना कीजिए: हज़ारों बीमार लोग कुंड के चारों ओर जमा हैं, और उसके पानी के हिलने का इंतज़ार कर रहे हैं.
बेतहसदा नाम का अर्थ है “दया का घर.” इस कुंड की खासियत यह थी कि जब भी कोई स्वर्गदूत पानी को हिलाता था, तो उसमें सबसे पहले उतरने वाला व्यक्ति – चाहे बीमारी कैसी भी हो या कितनी भी गंभीर – पूरी तरह से ठीक हो जाता था.
बेतहसदा में उम्र कोई मायने नहीं रखती थी. चाहे किसी को अस्थमा हो, कैंसर हो या कोई और जानलेवा बीमारी हो, इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता था. बस शर्त यह थी कि पानी हिलने पर उसमें सबसे पहले उतरना है. किसी को नहीं पता था कि वह पल कब आएगा. कुंड सचमुच दया का स्रोत था.
फिर भी, यह पूरी दया नहीं थी, और न ही यह सभी के लिए उपलब्ध थी. इंतज़ार करने वालों में एक ऐसा व्यक्ति भी था जो अड़तीस सालों से पीड़ित था और ठीक होने की उम्मीद लगाए बैठा था.
क्या आप जानते हैं कि बेतहसदा के पाँच ओसारे और अड़तीस साल से बीमार व्यक्ति किस बात का प्रतीक हैं?
जिस तरह मूसा की व्यवस्था (कानून) पाँच किताबों – उत्पत्ति, निर्गमन, लैव्यव्यवस्था, गिनती और व्यवस्थाविवरण – से बनी है, उसी तरह बेतहसदा कुंड में भी पाँच बरामदे थे. अड़तीस साल से बीमार व्यक्ति इज़राइल का प्रतिनिधित्व करता है. मिस्र से निकलने के समय से लेकर जंगल में भटकने का समय पूरा होने तक, इज़राइलियों ने जंगल में अड़तीस साल बिताए. हालाँकि व्यवस्था में परमेश्वर की दया शामिल थी, लेकिन वह पूरी तरह से चंगाई या पूर्ण उद्धार नहीं ला सकती थी.
फिर यीशु आए और उन्होंने अनुग्रह की वाचा की शुरुआत की. वह दया से भरपूर हैं और जो कोई उनके पास आता है, उसे कभी नहीं ठुकराते. जो भी व्यक्ति मसीह के पास आता है, उसे करुणा मिलती है. उनमें ईश्वरीय चंगाई और पूर्ण बहाली है. जिस तरह बेतहसदा में पाँच ओसारे थे, उसी तरह मसीह के शरीर पर उनके पाँच घावों के निशान हैं. और जिस तरह चंगाई देने वाला पानी कुंड में भरा होता था, उसी तरह उद्धार और चंगाई लाने के लिए उनके उन घावों से उनका बहुमूल्य लहू बहा. एक ईसाई लेखक ने एक बार बेतहसदा तक पहुँचने के रास्ते का वर्णन इन शब्दों में किया था: ” बेतहसदा का रास्ता विश्वास का रास्ता है. उस रास्ते पर तब तक चलें जब तक आप मसीही अनंत जीवन नामक शहर तक न पहुँच जाएँ. वहाँ आप मसीह नामक कुंड तक पहुँचेंगे. उनके पाँच घावों की शरण में जाएँ और उनके बहुमूल्य लहू में खुद को डुबो लें. जिस पल आप ऐसा करेंगे, आपकी आत्मा की सबसे बड़ी बीमारी जोकि पाप है दूर हो जाएँगी.”
परमेश्वर के प्रिय लोगों, आज भी यीशु मसीह दया से भरपूर हैं. वे आपकी बीमारियों को ठीक करने, आपकी कमज़ोरियों को दूर करने और आपको पूरी तरह स्वस्थ बनाने में समर्थ हैं.
मनन करने के लिए वचन: ” यीशु ने उस से कहा, उठ, अपनी खाट उठाकर चल फिर.
9 वह मनुष्य तुरन्त चंगा हो गया, और अपनी खाट उठाकर चलने फिरने लगा.” (यूहन्ना 5:8–9)