सितम्बर 29 – बिना कपट का जीवन।
“यीशु ने नतनएल को अपनी ओर आते देखकर उसके विषय में कहा, देखो, यह सचमुच इस्त्राएली है: इस में कपट नहीं.” (यूहन्ना 1:47)
नतनएल यीशु के शुरुआती चेलों में से एक थे. यूहन्ना के सुसमाचार में उन्हें नतनएल कहा गया है, जबकि दूसरे सुसमाचारों में उनकी पहचान बरथोलोमय के रूप में की गई है (मत्ती 10:3; मरकुस 3:18). फिलिप्प ही नतनएल को मसीह के पास लाए थे (यूहन्ना 1:45).
यीशु ने नतनएल के बारे में कितनी सुंदर गवाही दी! “देखो, सचमुच एक इस्राएली, जिसमें कोई छल-कपट नहीं है!” दूसरे शब्दों में, वह बिना कपट वाला व्यक्ति था—परमेश्वर का एक सच्चा और ईमानदार शिष्य, जिसके दिल में कोई दोमुंहापन नहीं था; ऐसा व्यक्ति जो बाहर से कुछ और कहता था और अंदर कुछ और ही सोचता था.
प्रभु से ऐसी गवाही पाना कितना बड़ा सौभाग्य है!
“क्योंकि मनुष्य बाहरी रूप को देखता है, लेकिन प्रभु हृदय को देखता है.” (1 शमूएल 16:7) प्रभु हृदय की गहराइयों को खोजते और परखते हैं. उनकी नज़रों से कुछ भी छिपा नहीं है.
दुख की बात है कि बहुत से लोग ईमानदार और सच्चे जीवन नहीं जीते. वे मुखौटे पहनकर जीते हैं, पाखंड करते हैं और धोखे-भरी बातें करते हैं. यहूदा इस्करियोती तीन साल से ज़्यादा समय तक मसीह के साथ रहा, फिर भी उसका दिल धोखे और विश्वासघात से भरा हुआ था.
यहाँ तक कि जिस चुंबन से यहूदा ने यीशु का अभिवादन किया, वह सच्चे स्नेह का इज़हार नहीं था; बल्कि वही वह संकेत था जिससे उसने उन्हें धोखा दिया. यही तो धोखा है. उसने बाहर से एक अच्छे और प्यार करने वाले चेले जैसा व्यवहार करते हुए अपने दिल में विश्वासघात छिपा रखा था. यहूदा का अंत कितना दुखद हुआ!
पवित्र शास्त्र यह गंभीर चेतावनी देता है: “जो बैरी बात से तो अपने को भोला बनाता है, परन्तु अपने भीतर छल रखता है, उसकी मीठी-मीठी बात प्रतीति न करना, क्योंकि उसके मन में सात घिनौनी वस्तुएं रहती हैं;” (नीतिवचन 26:24–25)
यीशु की धरती पर सेवा के दौरान, फरीसियों, सदूकियों और शास्त्रियों को धार्मिक नेता माना जाता था. फिर भी वे सचमुच आध्यात्मिक लोग नहीं थे, और न ही वे ऐसे इस्राएली थे जिनमें कोई छल-कपट न हो. वे धार्मिक रीति-रिवाजों और परंपराओं का तो ध्यान से पालन करते थे, लेकिन उनके दिल परमेश्वर से दूर थे.
प्रभु ने बहुत कड़े शब्दों में उनसे कहा: “हे कपटी शास्त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय; तुम चूना फिरी हुई कब्रों के समान हो जो ऊपर से तो सुन्दर दिखाई देती हैं, परन्तु भीतर मुर्दों की हिड्डयों और सब प्रकार की मलिनता से भरी हैं.” (मत्ती 23:27) और उन्होंने फिर कहा: “इसी रीति से तुम भी ऊपर से मनुष्यों को धर्मी दिखाई देते हो, परन्तु भीतर कपट और अधर्म से भरे हुए हो॥” (मत्ती 23:28)
पूरे मत्ती 23 अध्याय में, प्रभु ने शास्त्रियों और फरीसियों के ढोंग के कारण बार-बार उन पर “हाय” कहा. प्रभु छल-कपट वाले जीवन से नफरत करते हैं. वे ऐसा जीवन नहीं चाहते जो बाहर से तो आध्यात्मिक दिखे लेकिन अंदर से कुछ और ही हो.
परमेश्वर के प्रिय लोगो, अपने जीवन को ईमानदारी और सच्चाई पर बनाए. अपने जीवन को ढोंग से मुक्त रखे. सच को सच ही कह. आपके होंठ जो कहें, आपका दिल भी उससे सहमत हो. प्रभु हमें शुद्ध हृदय, ईमानदार इरादे, सच्चे होंठ और छल-कपट रहित जीवन दें—ताकि हम उनकी उपस्थिति के प्रकाश में चल सकें और उनकी दृष्टि में अनुग्रह पा सकें.
मनन के लिए वचन: “क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो॥” (भजन संहिता 32:2)