अगस्त 07 – बुद्धि का परमेश्वर।
“फूलकर अहंकार की ओर बातें मत करो, और अन्धेर की बातें तुम्हारे मुंह से न निकलें; क्योंकि यहोवा ज्ञानी ईश्वर है, और कामों को तौलने वाला है॥” (1 शमूएल 2:3)
1 शमूएल अध्याय 2 में, हम हन्ना का खुशी भरा स्तुति-गीत पढ़ते हैं. प्रभु की पवित्रता की सुंदरता का गुणगान करने के बाद, उसने उनकी अनंत बुद्धि की भी महिमा की. आप प्रभु की पवित्रता के लिए जितनी अधिक स्तुति करेंगे, आप पवित्रता में उतने ही बढ़ेंगे. इसी तरह, आप उनकी बुद्धि के लिए जितनी अधिक स्तुति करेंगे, आप ईश्वरीय बुद्धि से उतने ही समृद्ध होंगे.
ईश्वरीय बुद्धि क्या है? यह वह बुद्धि है जिसके द्वारा परमेश्वर शक्तिशाली लोगों के धनुष तोड़ देते हैं और कमजोरों को शक्ति से भर देते हैं. यह वह बुद्धि है जो उन्हें बांझ स्त्री को संतान का आशीर्वाद देने और उसके अपमान को खुशी में बदलने में सक्षम बनाती है. इस दुनिया की बुद्धि है, इंसानों की स्वाभाविक बुद्धि है, और यहाँ तक कि शैतान की धोखे भरी बुद्धि भी है. लेकिन प्रभु की बुद्धि असीम और अतुलनीय है. जिनके पास बुद्धि की कमी है, उन्हें वे खुलकर बुद्धि देते हैं.
“पर यदि तुम में से किसी को बुद्धि की घटी हो, तो परमेश्वर से मांगे, जो बिना उलाहना दिए सब को उदारता से देता है; और उस को दी जाएगी.” (याकूब 1:5) पवित्र शास्त्र यह भी कहते हैं: “यहोवा का भय मानना बुद्धि का मूल है; बुद्धि और शिक्षा को मूढ़ ही लोग तुच्छ जानते हैं॥” (नीतिवचन 1:7)
राजा शाऊल के पास गोलियत को हराने की कोई रणनीति नहीं थी. जब दाऊद आगे आया, तो शाऊल ने उसे केवल हतोत्साहित ही किया. सच्ची ईश्वरीय बुद्धि तब शुरू होती है जब हम अपने विचारों को परमेश्वर की सोच के साथ मिलाते हैं. परमेश्वर की बुद्धि, अटूट विश्वास और पवित्र जोश के कारण ही दाऊद ने उस विशालकाय योद्धा को बहुत आसानी से हरा दिया.
प्रभु की बुद्धि हर दूसरी तरह की बुद्धि से कहीं बढ़कर है. उनसे बुद्धि मांगें. उस आत्मा से भरें जो बुद्धि देती है. बुद्धि के वचन के आध्यात्मिक वरदान को खोजें, जिसके माध्यम से पवित्र आत्मा खास स्थितियों के लिए ईश्वरीय समझ प्रकट करती है.
जब मिस्र को सात साल के भीषण अकाल का सामना करना पड़ा, तो देश को आने वाले समय की तैयारी के लिए बुद्धिमान व्यक्ति की आवश्यकता थी. फिरौन ने यूसुफ में वह व्यक्ति देखा और घोषणा की: “फिर फिरौन ने यूसुफ से कहा, परमेश्वर ने जो तुझे इतना ज्ञान दिया है, कि तेरे तुल्य कोई समझदार और बुद्धिमान् नहीं;” (उत्पत्ति 41:39)
नतीजतन, यूसुफ को मिस्र का शासक नियुक्त किया गया, जो खुद फिरौन के बाद दूसरे स्थान पर था. अपनी नज़रें प्रभु पर टिकाएँ. वह साधारण लोगों को भी बुद्धिमान बनाने में समर्थ हैं. आपको उनकी बुद्धि की ज़रूरत न केवल बड़ी ज़िम्मेदारियों के लिए, बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी के साधारण कामों के लिए भी है. आपकी बातचीत, आपके रिश्तों, आपके फ़ैसलों और आपके व्यवहार में बुद्धि की ज़रूरत होती है. प्रभु आपकी ज़बान पर अपनी बुद्धि रखेंगे. तब आपको एहसास होगा कि बोलने वाले सिर्फ़ आप नहीं हैं, बल्कि आपके पिता की आत्मा आपके ज़रिए बोल रही है. “क्योंकि बोलने वाले तुम नहीं हो परन्तु तुम्हारे पिता का आत्मा तुम में बोलता है.” (मत्ती 10:20)
परमेश्वर के प्रिय लोगों , यही वह बुद्धि और समझ है जो प्रभु अपने लोगों को देना चाहते हैं. पवित्र शास्त्र कहता है: “सो तुम उन को धारण करना और मानना; क्योंकि और देशों के लोगों के साम्हने तुम्हारी बुद्धि और समझ इसी से प्रगट होगी, अर्थात वे इन सब विधियों को सुनकर कहेंगे, कि निश्चय यह बड़ी जाति बुद्धिमान और समझदार है.” (व्यवस्थाविवरण 4:6)
मनन के लिए वचन: “पर जो ज्ञान ऊपर से आता है वह पहिले तो पवित्र होता है फिर मिलनसार, कोमल और मृदुभाव और दया, और अच्छे फलों से लदा हुआ और पक्षपात और कपट रहित होता है.” (याकूब 3:17)