अगस्त 04 – प्रार्थनाएँ सुनने वाले परमेश्वर।
“और यहोवा ने उस से कहा, जो प्रार्थना गिड़गिड़ाहट के साथ तू ने मुझ से की है, उसको मैं ने सुना है, यह जो भवन तू ने बनाया है, उस में मैं ने अपना नाम सदा के लिये रख कर उसे पवित्र किया है; और मेरी आंखें और मेरा मन नित्य वहीं लगे रहेंगे.” (1 राजा 9:3)
जवानी के दिनों में, सुलैमान प्रभु से पूरे हृदय से प्रेम करता था और उसने उनके लिए एक शानदार मंदिर बनवाया. मंदिर के समर्पण के समय, उसने एक लंबी और सच्ची प्रार्थना की, जो 1 राजा 8:22–53 में लिखी है. यह एक सरल प्रार्थना थी, जो खुले हृदय से की गई थी. परमेश्वर के साथ ऐसी हृदय से की गई बातचीत हमेशा अर्थपूर्ण होती है, और इसका जवाब ज़रूर मिलता है.
सुलैमान की विनती यह थी: “कि तेरी आंख इस भवन की ओर अर्थात इसी स्थान की ओर जिसके विषय तू ने कहा है, कि मेरा नाम वहां रहेगा, रात दिन खुली रहें: और जो प्रार्थना तेरा दास इस स्थान की ओर करे, उसे तू सुन ले. और तू अपने दास, और अपनी प्रजा इस्राएल की प्रार्थना जिस को वे इस स्थान की ओर गिड़गिड़ा के करें उसे सुनना, वरन स्वर्ग में से जो तेरा निवासस्थान है सुन लेना, और सुनकर क्षमा करना.”
उसने प्रार्थना की कि प्रभु उन लोगों की प्रार्थनाएँ सुनें जो हर परिस्थिति में उसे ढूँढ़ते हैं – चाहे वह कोई पापी हो, विश्वास से भटक गया व्यक्ति हो, अकाल से पीड़ित गरीब आदमी हो, या दुश्मनों से हारा हुआ कोई व्यक्ति हो. उसने प्रार्थना की कि परमेश्वर सूखे, महामारी या किसी अन्य मुसीबत के समय अपने मंदिर की ओर देखने वालों की प्रार्थना का जवाब दें. सुलैमान को कितनी खुशी हुई होगी जब प्रभु ने कृपापूर्वक उसकी प्रार्थना स्वीकार की और अपने लोगों की पुकार सुनने का वादा किया!
परमेश्वर के प्यारे लोगों, जब भी आप टूटे हुए मन के साथ प्रभु के घर आयेंगे, उसकी वेदी के सामने घुटने टेकेंगे, और आँसुओं के साथ अपना हृदय उड़ेलेग, तो वह ज़रूर आपकी प्रार्थना सुनेगा और उसका जवाब देगा. वह कभी भी अपने लोगों के आँसुओं को नज़रअंदाज़ करके आगे नहीं बढ़ता. आपके आँसू उसके लिए कीमती हैं – वे उसको कुप्पी में रखता हैं. अपनी कोमल दया में, वह ज़रूर आपके लिए चमत्कार करेगा.
कुछ वर्ष पहले, एक बुरे आदमी ने नकली रजिस्ट्रेशन कागज़ात बनाए, गैर-कानूनी तरीके से किसी और का घर हड़प लिया और उसे हिंसक अपराधियों के एक समूह को बेच दिया. असली मालिक ने जो दुख सहा, उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता. उसे लगातार धमकियाँ मिलीं, डराया-धमकाया गया और वह डर के साये में रहा.
एक दिन, किसी ने उसे फ़ोन किया और बुरी-बुरी बातें कहीं. बहुत परेशान होकर, वह सीधे परमेश्वर के घर गया, प्रभु के सामने घर के कागज़ात रखे और टूटे हुए हृदय से प्रार्थना की.
प्रभु की स्तुति हो! परमेश्वर ने उसकी विनती की आवाज़ सुनी. प्रभु ने उससे कहा, “मेरे बेटे, डरो मत. मैंने तुम्हें पहाड़ों को रौंदने के लिए बुलाया है. तुम मिट्टी के मामूली टीलों से क्यों डरते हो?” उसी पल, समस्या हल हो गई.
परमेश्वर के प्रिय लोगों, आज कौन सा बोझ आपके हृदय को चुभ रहा है? आपके सामने पहाड़ जैसी कौन सी समस्या खड़ी है? उसे प्रभु के सामने लाये. उनके सामने अपना हृदय खोलकर रख दे. जिस परमेश्वर ने सुलैमान की प्रार्थना सुनी थी, वह आज भी अपने लोगों की पुकार सुनता है.
आज आप जिन मिस्रियों को देख रहे है – जो मुश्किलें और दुश्मन आपको परेशान कर रहे हैं – उन्हें आप फिर कभी नहीं देखेंगे. प्रभु आपको सभी बुरे लोगों के हाथों से बचाएगा.
मनन के लिए वचन: “मुझे अपने सत्य पर चला और शिक्षा दे, क्योंकि तू मेरा उद्धार करने वाला परमेश्वर है; मैं दिन भर तेरी ही बाट जोहता रहता हूं.” (भजन संहिता 23:5)