अगस्त 03 – मैंने परमेश्वर को आमने-सामने देखा है।
“तब याकूब ने यह कह कर उस स्थान का नाम पनीएल रखा: कि परमेश्वर को आमने-सामने देखने पर भी मेरा प्राण बच गया है.” (उत्पत्ति 32:30)
याकूब का मानना था कि कोई भी परमेश्वर का चेहरा देखकर जीवित नहीं रह सकता. पुराने नियम के कई संतों की भी यही समझ थी. वे परमेश्वर को भस्म करने वाली आग और ऐसे परमेश्वर के रूप में देखते थे जो ऐसी रोशनी में रहते हैं जिसके पास कोई नहीं जा सकता.
फिर भी, भले ही वे सचमुच भस्म करने वाली आग हैं और पवित्र व जलन रखने वाले परमेश्वर हैं, वे असीम प्रेम और कोमल दया के परमेश्वर भी हैं. पवित्र शास्त्र कहता है: “और यहोवा मूसा से इस प्रकार आम्हने-साम्हने बातें करता था, जिस प्रकार कोई अपने भाई से बातें करे. और मूसा तो छावनी में फिर आता था, पर यहोशू नाम एक जवान, जो नून का पुत्र और मूसा का टहलुआ था, वह तम्बू में से न निकलता था॥” (निर्गमन 33:11)
मैंने कई पिताओं को देखा है जो अपने बच्चों के साथ प्यार और नरमी से पेश आते हैं. जब उनके बच्चे गलतियाँ करते हैं, तब भी वे उन्हें सही अनुशासन के साथ सुधारते हैं और सही मार्ग पर लाते हैं. क्योंकि वे अपने बच्चों की शिक्षा, चरित्र और भविष्य को बहुत महत्व देते हैं, इसलिए वे उनकी भलाई के लिए हर कुर्बानी देने को तैयार रहते हैं. उनके चेहरे से ही उनका प्यार झलकता है. इसी तरह, हमारे प्रभु का चेहरा अनुग्रह और प्रेमपूर्ण दया से चमकता है.
पहला, प्रभु का चेहरा उनकी दिव्य उपस्थिति को प्रकट करता है. उस उपस्थिति से उनकी पूर्ण शांति बहती है. जब भी परमेश्वर के सेवक मंडली पर आशीष की घोषणा करते हैं, तो वे कहते हैं: “यहोवा अपना मुख तेरी ओर करे, और तुझे शांति दे.” (गिनती 6:26)
प्रभु की उपस्थिति से मिलने वाली शांति, दुनिया की किसी भी शांति से अलग है, जिसे न तो दुनिया दे सकती है और न ही छीन सकती है. यह परमेश्वर की वह शांति है जो समझ से परे है. उनका अनुग्रहकारी चेहरा हमारे दिलों को खुशी और आनंद से भर देता है.
दूसरा, उनके चेहरे से हमें उनके अनुग्रह की अपार समृद्धि मिलती है. “प्रभु तुम पर अपना चेहरा चमकाए और तुम पर अनुग्रह करे.” (गिनती 6:25)
ध्यान दें कि उनका चेहरा हम पर चमकता है. वह तेजस्वी प्रकाश उनके लोगो पर बरसने वाले अनुग्रह के रूप में आता है. दाऊद इस बात को अच्छी तरह समझते थे और उन्होंने कहा था कि प्रभु की प्रेमपूर्ण दया जीवन से भी बढ़कर है. भजनकार हमें यह भी सिखाते हैं कि प्रभु का चेहरा कैसे खोजें: “परन्तु मैं तो धर्मी होकर तेरे मुख का दर्शन करूंगा जब मैं जानूंगा तब तेरे स्वरूप से सन्तुष्ट हूंगा॥” (भजन संहिता 17:15)
परमेश्वर के प्रिय लोगों, प्रभु के चेहरे की वैसी ही चाहत रखे जैसे प्यारे बच्चे अपने पिता के चेहरे की चाहत रखते हैं. वैसे ही प्रार्थना करे जैसे भजनकार ने की थी: “अपने दास पर अपने मुख का प्रकाश चमका दे, और अपनी विधियां मुझे सिखा.” (भजन संहिता 119:135)
हर समय प्रभु का चेहरा खोजते रहे, और उनकी दयालु उपस्थिति से मिलने वाली भरपूर आशीषें प्राप्त करे.
मनन के लिए वचन: “तू ने कहा है, कि मेरे दर्शन के खोजी हो. इसलिये मेरा मन तुझ से कहता है, कि हे यहोवा, तेरे दर्शन का मैं खोजी रहूंगा.” (भजन संहिता 27:8)