अक्टूबर 15 – धर्मी व्यक्ति।
“.. और जो धर्मी है, वह धर्मी बना रहे; और जो पवित्र है, वह पवित्र बना रहे.” (प्रकाशितवाक्य 22:11)
बाइबल के आखिरी अध्याय, प्रकाशितवाक्य 22 में, प्रभु धार्मिकता और पवित्रता पर बहुत ज़ोर देते हैं. असल में, जो कोई भी प्रभु के आने पर तैयार पाया जाना चाहता है, उसके जीवन में धार्मिकता और पवित्रता बहुत ज़रूरी हैं.
यीशु मसीह कहते हैं: “..और जो धर्मी है, वह धर्मी बना रहे; और जो पवित्र है, वह पवित्र बना रहे. देख, मैं शीघ्र आने वाला हूं; और हर एक के काम के अनुसार बदला देने के लिये प्रतिफल मेरे पास है.” (प्रकाशितवाक्य 22:11–12)
जब मसीह आएँगे, तो हमको निश्चित रूप से अपने धार्मिकता और पवित्रता वाले जीवन के अनुसार इनाम मिलेगा. इसलिए, हर दिन धार्मिकता और पवित्रता के लिए भूखे और प्यासे रहें. अपने दिल में इस चाहत के साथ आगे बढ़ें: “मुझे पवित्रता में बढ़ना है. मुझे और ज़्यादा धार्मिकता में चलना है.”
एक बार जंगल में एक हिरण था जो बहुत तेज़ी से दौड़ सकता था. जंगल का कोई भी दूसरा जानवर उसकी रफ़्तार का मुक़ाबला नहीं कर सकता था. लेकिन एक दिन, एक मेंढक ने हिरण को दौड़ की चुनौती दी. सभी जानवर आस-पास जमा हो गए, और दौड़ शुरू हुई. जैसे ही हिरण दौड़ने लगा, मेंढक उसकी पीठ पर कूद गया और कसकर पकड़ लिया. हिरण को इसका पता नहीं चला और वह पूरी रफ़्तार से दौड़ता रहा. जैसे ही वह समापन रेखा के पास पहुँचा, उसने बार-बार पीछे मुड़कर देखा कि मेंढक कहाँ है. ठीक उसी पल का मेंढक इंतज़ार कर रहा था. वह तेज़ी से हिरण की पीठ से कूदा, फ़िनिश लाइन तक पहुँचा और जीत हासिल कर ली!
यहाँ एक ज़रूरी आध्यात्मिक सीख है. अपनी खुद की धार्मिकता को भूल जाएँ और मसीह की धार्मिकता को अपनाएँ.
मसीह इस दुनिया में धार्मिकता से जिए. उन्होंने धार्मिकता के काम किए, न्याय और धार्मिकता को बनाए रखा, और अपनी दौड़ को जीत के साथ पूरा किया.
पुराने नियम के धर्मी लोगों ने व्यवस्था द्वारा बताई गई धार्मिकता के आधार पर अपनी दौड़ दौड़ी. फिर भी, चाहे वे कितनी भी ईमानदारी से दौड़े हों, उनकी अपनी धार्मिकता कभी भी परमेश्वर की परिपूर्ण धार्मिकता के स्तर तक नहीं पहुँच सकती थी.
लेकिन हम धन्य हैं! हम अपनी खुद की धार्मिकता पर निर्भर नहीं हैं. हम मसीह की धार्मिकता पर निर्भर हैं. हम उनसे जुड़े हुए हैं. उन्होंने हमें धर्मी बनाया है और अपनी धार्मिकता का वस्त्र पहनाया है. इसलिए, हमारी
दौड़ जीत के साथ खत्म होगी—हमारी अपनी ताकत या अच्छाई की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए कि हम मसीह और उनकी धार्मिकता पर भरोसा कर रहे हैं.
प्रेरित पौलुस, जिन्होंने मसीह की धार्मिकता को अपनाया था, अपनी दौड़ के आखिर में कह सके: “मैं अच्छी कुश्ती लड़ चुका हूं मैं ने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैं ने विश्वास की रखवाली की है.” (2 तीमुथियुस 4:7) वे उस धार्मिकता के मुकुट का इंतज़ार कर रहे थे जो प्रभु उन्हें देंगे.
मसीह के अनगिनत संतों ने भी परमेश्वर के सामने धर्मी लोगों की तरह चलते हुए अपनी दौड़ ईमानदारी से पूरी की है. हम मसीही इतिहास के पन्नों में उनके पदचिह्न देख सकते हैं. प्रभु आपकी दौड़ को भी जीत के साथ पूरा करने में आपकी मदद करेंगे.
मनन के लिए वचन: “मेरे लिये धर्म के द्वार खोलो, मैं उन से प्रवेश करके याह का धन्यवाद करूंगा॥” (भजन संहिता 118:19)