अगस्त 15 – गाकर खुशी मनाएं!
“भक्त लोग महिमा के कारण प्रफुल्लित हों; और अपने बिछौनों पर भी पड़े पड़े जयजयकार करें.” (भजन संहिता 149:5)
जो लोग अपना दिन परमेश्वर की इच्छा पूरी करने और प्रभु को प्रसन्न करने में बिताते हैं, वे निश्चित रूप से अपनी शामें उसकी महिमा में आनन्दित होकर और अपने बिछौनों पर ऊँचे स्वर में गाते हुए बिताते हैं.
रात कुछ लोगों के लिए खुशी लाती है, तो दूसरों के लिए दुख. एक रात ऐसी थी जब मिस्र देश रोने-धोने और शोक से भर गया था क्योंकि विनाश करने वाले स्वर्गदूत ने मनुष्यों और पशुओं, दोनों के ही पहलौठे बच्चों को मार डाला था. लेकिन हर उस घर में, जहाँ विश्वास के साथ मेमने का लहू दरवाज़े की चौखटों पर लगाया गया था, खुशी और आनंद का माहौल था. उन्होंने प्रभु की दयालु सुरक्षा को याद करते हुए उनकी स्तुति की.
इसी तरह, जो लोग दिन भर पवित्र जीवन जीते हैं, शैतान के प्रलोभनों पर विजय पाते हैं और जीत के साथ चलते हैं, वे आभारी हृदय के साथ अपने बिछौनों पर जाते हैं और प्रभु की अपार दया पर विचार करते हुए उसकी स्तुति के गीत गाते हैं. इसके विपरीत, दूसरे लोग इस तरह विलाप करते हैं: “हमारे मन का हर्ष जाता रहा, हमारा नाचना विलाप में बदल गया है. हमारे सिर पर का मुकुट गिर पड़ा है; हम पर हाय, क्योंकि हम ने पाप किया है!” (विलापगीत 5:15–16)
परमेश्वर के लोगों सावधान रहे ताकि आप पाप के गुलाम न बन जाए.
राजा अहाब अक्सर गहरे दुख के साथ अपने बिस्तर पर जाता था. उसकी खुशी इसलिए गायब हो गई क्योंकि उसने नाबोत के अंगूर के बाग का लालच किया था. जब नाबोत ने राजा के पैसे और दूसरे अंगूर के बाग के प्रस्ताव, दोनों को ठुकरा दिया, तो अहाब बहुत निराश हो गया. बाइबल कहती है कि उसने अपना मुँह दीवार की ओर कर लिया और अपने बिस्तर पर लेट गया. जिन लोगों में संतोष की कमी होती है, वे अक्सर अपना दिन ऐसी ही उदासी में बिताते हैं.
कभी-कभी पति-पत्नी के बीच अनबन हो जाती है. अगर पति तुरंत वह साड़ी या गहने नहीं खरीदता जो उसकी पत्नी चाहती है, तो वह नाराज़ हो सकती है और कह सकती है, “अगर यह तुम्हारी माँ के लिए होता, तो तुम बिना किसी हिचकिचाहट के खरीद लेते. इस घर में मेरे साथ नौकरानी जैसा व्यवहार किया जाता है,” और फिर गुस्से में मुँह फेर लेती है. जो लोग छोटी-छोटी बातों को बहुत बड़ा बना देते हैं, वे अक्सर अपनी शांतिपूर्ण नींद खो बैठते हैं.
अब पौलुस और सीलास के बारे में सोचिए. उन्हें बुरी तरह पीटा गया था और उनके पैरों को काठ में जकड़ दिया गया था. फिर भी उन्होंने कोई शिकायत या बड़बड़ाहट नहीं की. कलवरी के प्रभु के प्रेम और बलिदान ने उनके दिलों को खुशी से भर दिया था. जेल में भी, उन्होंने जीत के साथ परमेश्वर की स्तुति में गीत गाए.
बाइबल कहती है: “धर्मी गाते और आनन्द मनाते हैं.” (नीतिवचन 29:6) और फिर: “परन्तु जितने तुझ पर भरोसा रखते हैं वे सब आनन्द करें, वे सर्वदा ऊंचे स्वर से गाते रहें; क्योंकि तू उनकी रक्षा करता है, और जो तेरे नाम के प्रेमी हैं तुझ में प्रफुल्लित हों.” (भजन संहिता 5:11)
परमेश्वर के प्रिय लोगों, हम सब प्रभु की स्तुति करने, उसके लिए गीत गाने और अपनी आराधना से उसका मन प्रसन्न करने के लिए बुलाया गए है.
मनन के लिए वचन: “मैं शान्ति से लेट जाऊंगा और सो जाऊंगा; क्योंकि, हे यहोवा, केवल तू ही मुझ को एकान्त में निश्चिन्त रहने देता है॥” (भजन संहिता 4:8)