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अक्टूबर 04 – परमेश्वर को खोजने का समय!

“अपने लिये धर्म का बीज बोओ, तब करूणा के अनुसार खेत काटने पाओगे; अपनी पड़ती भूमि को जोतो; देखो, अभी यहोवा के पीछे हो लेने का समय है, कि वह आए और तुम्हारे ऊपर उद्धार बरसाए॥” (होशे 10:12)

ऊपर दिए गए वचन में, भविष्यवक्ता होशे हमें याद दिलाते हैं कि यह केवल दिन का समय नहीं है; यह प्रभु को खोजने का समय है.

पूरे दिल और पूरी आत्मा से प्रभु को खोजें. उपवास और प्रार्थना के साथ उन्हें खोजें. बाइबल कहती है, “ढूढो, और तुम पाओगे.” दूसरे अनुवाद यह विचार देते हैं, “खोजते रहो, और तुम पाओगे.” इसलिए हमें लगातार और सच्चे मन से प्रभु को खोजने के लिए बुलाया गया है.

शूलेमी स्त्री कहती है: “रात के समय में अपने पलंग पर अपने प्राणप्रिय को ढूंढ़ती रही; मैं उसे ढूंढ़ती तो रही, परन्तु उसे न पाया; मैं ने कहा, मैं अब उठ कर नगर में, और सड़कों और चौकों में घूमकर अपने प्राणप्रिय को ढूंढूंगी. मैं उसे ढूंढती तो रही, परन्तु उसे न पाया. जो पहरूए नगर में घूमते थे, वे मुझे मिले, मैं ने उन से पूछा, क्या तुम ने मेरे प्राणप्रिय को देखा है? मुझ को उनके पास से आगे बढ़े थोड़े ही देर हुई थी कि मेरा प्राणप्रिय मुझे मिल गया. मैं ने उसको पकड़ लिया, और उसको जाने न दिया जब तक उसे अपनी मात के घर अर्थात अपनी जननी की कोठरी में न ले आई॥” (श्रेष्ठगीत 3:1-2,4)

हर दिन, अपनी प्रार्थना के समय, प्रभु का चेहरा खोजें. यह जानने के लिए उत्सुक रहें कि वह आपसे क्या कहना चाहते हैं. उनकी आवाज़ सुनने और अपने जीवन के लिए उनकी इच्छा को समझने की चाहत रखें. बाइबल कहती है: “.. और यदि तुम उसकी खोज में लगे रहो, तब तो वह तुम से मिला करेगा, परन्तु यदि तुम उसको त्याग दोगे तो वह भी तुम को त्याग देगा.” (2 इतिहास 15:2)

एक तरफ, हम उसे खोजते हैं. दूसरी तरफ, वह हमें खोज रहा है. हमारे प्रति अपने महान प्रेम और स्नेह के कारण, वह स्वर्ग छोड़कर हमें खोजने के लिए पृथ्वी पर आया. उसने हमें खोजने के लिए पथरीले और काँटेदार रास्तों पर यात्रा की. खोए हुए लोगों के लिए प्यार की वजह से ही यीशु ने हमें लुका 15 में लिखी खूबसूरत बातें बताईं.

वहाँ हम उस अच्छे चरवाहे की कहानी पढ़ते हैं जो खोई हुई भेड़ को तब तक ढूँढ़ता है जब तक वह मिल न जाए; उस औरत की कहानी जो खोए हुए चाँदी के सिक्के को तब तक लगन से ढूँढ़ती है जब तक वह मिल न जाए; और उस पिता की कहानी जो अपने खोए हुए बेटे के घर लौटने का बेसब्री से इंतज़ार करता है.

प्रभु आपको ढूँढ़ रहे हैं—इसलिए, आपको भी उन्हें ढूँढ़ना चाहिए. प्रभु आपसे प्यार करते हैं—इसलिए, आपको भी उनसे प्यार करना चाहिए. यह समय पूरे दिल और लगन से प्रभु को ढूँढ़ने का है.

चींटियों को देखिए. वे अपने समय का सही इस्तेमाल करती हैं. जब खाना इकट्ठा करने का मौसम होता है, तो वे मेहनत से खाना ढूँढ़ती हैं और बारिश का मौसम आने से पहले उसे जमा कर लेती हैं. क्योंकि वे पहले से तैयारी कर लेती हैं, इसलिए वे बिना किसी चिंता और शांति के बारिश का मौसम बिता पाती हैं.

ठीक उसी तरह, आध्यात्मिक अकाल का समय आने से पहले—यानी ऐसा समय जब परमेश्वर का वचन आसानी से न मिल पाए—परमेश्वर के वचन को पढ़ें और उस पर मनन करें, क्योंकि वही आत्मा और जीवन है. अच्छी आध्यात्मिक किताबें पढ़ें और उनसे मिलने वाले फ़ायदों को अपनाएँ. हाँ, यह समय प्रभु और उनके वचन को ढूँढ़ने का है.

मनन के लिए वचन: “जो बेटा धूपकाल में बटोरता है वह बुद्धि से काम करने वाला है, परन्तु जो बेटा कटनी के समय भारी नींद में पड़ा रहता है, वह लज्जा का कारण होता है.” (नीतिवचन 10:5)

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